श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  6.5.5-6 
कामक्रोधभयद्वेषलोभमोहविषादज:।
शोकासूयावमानेर्ष्यामात्सर्यादिमयस्तथा॥ ५॥
मानसोऽपि द्विजश्रेष्ठ तापो भवति नैकधा।
इत्येवमादिभिर्भेदैस्तापो ह्याध्यात्मिक: स्मृत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! काम, क्रोध, भय, द्वेष, लोभ, मोह, शोक, दुःख, असूया (गुणों में दोष), अपमान, ईर्ष्या और मद आदि अनेक प्रकार के मानसिक ताप हैं। ऐसे नाना प्रकार के भेदों वाले ताप को आध्यात्मिक ताप कहते हैं। 5-6॥
 
O best of the two! There are many types of mental heat including lust, anger, fear, hatred, greed, attachment, sadness, sorrow, asuya (accusation in qualities), insult, jealousy and lust etc. Such heat with different types of differences is called spiritual. 5-6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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