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श्लोक 6.5.43  |
एतान्यन्यानि चोग्राणि दु:खानि मरणे नृणाम्।
शृणुष्व नरके यानि प्राप्यन्ते पुरुषैर्मृतै:॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| ये तथा ऐसे ही अन्य भयंकर कष्ट तो मनुष्यों को मृत्यु के समय भोगने पड़ते हैं; अब मृत्यु के बाद नरक में उन्हें कैसी-कैसी यातनाएँ सहनी पड़ती हैं, यह सुनो॥ 43॥ |
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| These and other such terrible sufferings have to be endured by men at the time of death; now, listen to the tortures they have to endure in hell after death—॥ 43॥ |
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