श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.5.43 
एतान्यन्यानि चोग्राणि दु:खानि मरणे नृणाम्।
शृणुष्व नरके यानि प्राप्यन्ते पुरुषैर्मृतै:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
ये तथा ऐसे ही अन्य भयंकर कष्ट तो मनुष्यों को मृत्यु के समय भोगने पड़ते हैं; अब मृत्यु के बाद नरक में उन्हें कैसी-कैसी यातनाएँ सहनी पड़ती हैं, यह सुनो॥ 43॥
 
These and other such terrible sufferings have to be endured by men at the time of death; now, listen to the tortures they have to endure in hell after death—॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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