श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.5.40 
परिवर्तितताराक्षो हस्तपादं मुहु: क्षिपन्।
संशुष्यमाणताल्वोष्ठपुटो घुरघुरायते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उसकी आँखें चमकने लगती हैं, वह अत्यन्त पीड़ा से हाथ-पैर पटकने लगता है तथा उसके तालु और होठ सूखने लगते हैं ॥40॥
 
His eyes start to glow, he starts thrashing his hands and legs in great pain and his palate and lips start to dry up. ॥ 40॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd