श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.5.36 
एवमादीनि दु:खानि जरायामनुभूय वै।
मरणे यानि दु:खानि प्राप्नोति शृणु तान्यपि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वृद्धावस्था में ऐसे अनेक दुःख भोगकर, मृत्यु के समय जो कष्ट सहने पड़ते हैं, उन्हें सुनो ॥ 36॥
 
Having experienced many such sorrows in old age, listen to the sufferings one has to endure at the time of death. ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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