श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  6.5.3-4 
शिरोरोगप्रतिश्यायज्वरशूलभगन्दरै:।
गुल्मार्श:श्वयथुश्वासच्छर्द्यादिभिरनेकधा॥ ३॥
तथाक्षिरोगातीसारकुष्ठाङ्गामयसंज्ञितै:।
भिद्यते देहजस्तापो मानसं श्रोतुमर्हसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
सिर दर्द, नजला (पीनस), ज्वर, शूल, भगंदर, गठिया, बवासीर, सूजन, दमा, चकत्ते और नेत्रों के रोग, अतिसार और कुष्ठ आदि अनेक प्रकार के शारीरिक रोग हैं। अब मानसिक ताप सुनो॥3-4॥
 
There are many types of physical diseases like headache, catarrh (pinus), fever, colic, fistula, gout, piles, inflammation, asthma, rashes and eye diseases, diarrhea and leprosy etc. Now listen to the mental heat. 3-4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd