vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
»
श्लोक 29
श्लोक
6.5.29
प्रकटीभूतसर्वास्थिर्नतपृष्ठास्थिसंहति:।
उत्सन्नजठराग्नित्वादल्पाहारोऽल्पचेष्टित:॥ २९॥
अनुवाद
उसकी सब हड्डियाँ दिखाई देने लगती हैं, उसकी रीढ़ झुक जाती है और जठराग्नि मंद हो जाने के कारण उसका आहार और चेष्टाएँ कम हो जाती हैं ॥29॥
All his bones become visible, his spine bends and due to the slowing down of his gastric fire, his food intake and efforts decrease. ॥ 29॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd