श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.5.26 
नरकं कर्मणां लोपात्फलमाहुर्मनीषिण:।
तस्मादज्ञानिनां दु:खमिह चामुत्र चोत्तमम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमानों ने कहा है कि कर्म के लोप का फल नरक है; इसलिए अज्ञानी पुरुषों को इस लोक और परलोक दोनों में अत्यंत दुःख भोगना पड़ता है॥ 26॥
 
The wise have said that the result of omission of action is hell; therefore the ignorant men have to suffer extreme misery both in this world and the next.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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