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श्लोक 6.5.23  |
को धर्म: कश्च वाधर्म: कस्मिन्वर्तेऽथ वा कथम्।
किं कर्तव्यमकर्तव्यं किं वा किं गुणदोषवत्॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| धर्म क्या है? अधर्म क्या है? किसी परिस्थिति में मुझे कैसा आचरण करना चाहिए? कर्तव्य क्या है और अकर्तव्य क्या है? अथवा पुण्य क्या है और पाप क्या है?॥23॥ |
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| What is Dharma? What is Adharma? How should I behave in a given situation? What is duty and what is non-duty? Or what is virtuous and what is faulty?'॥23॥ |
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