श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.5.22 
केन बन्धेन बद्धोऽहं कारणं किमकारणम्।
किं कार्यं किमकार्यंवा किं वाच्यं किंच नोच्यते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैं किस बंधन में बँधा हूँ? इस बंधन का कारण क्या है? अथवा यह अकारण ही उत्पन्न हुआ है? मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? तथा मुझे क्या कहना चाहिए और क्या नहीं कहना चाहिए?॥22॥
 
By what bondage am I bound? What is the reason for this bondage? Or has it come about without any reason? What should I do and what should I not do? And what should I say and what should I not say?॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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