श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.5.21 
अज्ञानतमसाऽऽच्छन्नो मूढान्त:करणो नर:।
न जानाति कुत: कोऽहं क्वाहं गन्ता किमात्मन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अज्ञानरूपी अंधकार से आच्छादित हुआ मूर्ख मनुष्य यह नहीं जानता कि मैं कहाँ से आया हूँ, कौन हूँ, कहाँ जाऊँगा और मेरा स्वरूप क्या है?॥ 21॥
 
Covered in the darkness of ignorance, the foolish man does not know where I came from, who I am, where I will go and what is my nature?॥ 21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd