श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.5.1 
श्रीपराशर उवाच
आध्यात्मिकादि मैत्रेय ज्ञात्वा तापत्रयं बुध:।
उत्पन्नज्ञानवैराग्य: प्राप्नोत्यात्यन्तिकं लयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले, 'हे मैत्रेय! आध्यात्मिक, आधिदैविक और भौतिक - इन तीन प्रकार के दुःखों को जानकर तथा ज्ञान एवं वैराग्य को विकसित करके विद्वान् लोग परम विनाश को प्राप्त होते हैं।
 
Sri Parashara said, 'Oh Maitreya! After knowing the three types of sufferings - spiritual, supernatural and physical - and developing knowledge and detachment, learned people attain the ultimate destruction.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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