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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन
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श्लोक 9
श्लोक
6.4.9
पद्मयोनेर्दिनं यत्तु चतुर्युगसहस्रवत्।
एकार्णवीकृते लोके तावती रात्रिरिष्यते॥ ९॥
अनुवाद
जैसे ब्रह्माजी का एक दिन एक हजार चतुर्युग तक होता है, वैसे ही जब संसार एक सागर हो जाता है, तो उनकी रात्रि भी उतनी ही लम्बी हो जाती है॥9॥
Just as the day of Lord Brahma lasts for one thousand Chaturyuga, similarly when the world becomes one ocean, his night also becomes that long.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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