vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन
»
श्लोक 50
श्लोक
6.4.50
इत्येष तव मैत्रेय कथित: प्राकृतो लय:।
आत्यन्तिकमथो ब्रह्मन्निबोध प्रतिसञ्चरम्॥ ५०॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार मैंने तुमसे जगत् का स्वाभाविक प्रलय कहा; अब तुम परम प्रलय का वर्णन सुनो ॥50॥
O Maitreya, thus I have described to you the natural dissolution of the world; now listen to the description of the ultimate dissolution. ॥50॥
इति श्रीविष्णुपुराणे षष्ठेंऽशे चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×