श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.4.49 
नैवाहस्तस्य न निशा नित्यस्य परमात्मन:।
उपचारस्तथाप्येष तस्येशस्य द्विजोच्यते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे द्विज! वास्तव में सनातन परमात्मा का न दिन है, न रात; तथापि ऐसा केवल आरोपणपूर्वक कहा गया है ॥49॥
 
O twice born! In reality the eternal Supreme Being has neither day nor night; however, it is said so only by way of imposition. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)