ज्ञानात्मा ज्ञानयोगेन ज्ञानमूर्त्ति: स चेज्यते।
निवृत्ते योगिभिर्मार्गे विष्णुर्मुक्तिफलप्रद:॥ ४३॥
अनुवाद
तथा निवृत्ति मार्ग में स्थित योगीजन भी ज्ञानयोग के द्वारा उन्हीं ज्ञानस्वरूप भगवान विष्णु का यज्ञ करते हैं॥43॥
And the yogis situated in the path of retirement also perform the yajna of the same knowledgeable soul, Lord Vishnu, who is the embodiment of knowledge, through Gyan Yoga. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥