प्रवृत्तं च निवृत्तं च द्विविधं कर्म वैदिकम्।
ताभ्यामुभाभ्यां पुरुषैस्सर्वमूर्त्तिस्स इज्यते॥ ४१॥
अनुवाद
वैदिक कर्म दो प्रकार के हैं - प्रवृत्तिरूप (कर्मयोग) और निवृत्तिरूप (सांख्ययोग)। इन दोनों प्रकार के कर्मों से उन परम पुरुषोत्तम की ही पूजा होती है ॥41॥
Vedic karma is of two types – Pravrttirupa (Karmayoga) and Nivruttirupa (Sankhyayoga). Through both these types of deeds, only that Supreme Being Purushottam is worshipped. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥