श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.4.26 
परिमण्डलं च सुषिरमाकाशं शब्दलक्षणम्।
शब्दमात्रं तदाकाशं सर्वमावृत्य तिष्ठति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय केवल गोल, छिद्ररूपी, शब्दरूपी आकाश ही शेष रहता है; और वह शब्दरूपी आकाश ही सब कुछ आवृत करता रहता है॥ 26॥
 
At that time only the round, hole-like, word-like sky remains; and that word-only sky keeps covering everything.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)