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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन
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श्लोक 1
श्लोक
6.4.1
श्रीपराशर उवाच
सप्तर्षिस्थानमाक्रम्य स्थितेऽम्भसि महामुने।
एकार्णवं भवत्येतत्त्रैलोक्यमखिलं तत:॥ १॥
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - हे मुनिश्रेष्ठ! जब जल सप्त ऋषियों के स्थान को पार कर जाता है तब यह सम्पूर्ण त्रिलोकी महासमुद्र के समान हो जाती है।
Shri Parashar Ji said - O great sage! When the water crosses the place of the seven sages then this entire Triloki becomes like a great ocean.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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