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श्लोक 6.3.9  |
नाडिकाभ्यामथ द्वाभ्यां मुहूर्तो द्विजसत्तम।
अहोरात्रं मुहूर्तास्तु त्रिंशन्मासो दिनैस्तथा॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| हे दोनों भाइयों में श्रेष्ठ! ऐसी दो नाड़िकाओं से एक मुहूर्त, तीस मुहूर्तों से एक दिन-रात और उतने ही दिन-रातों से एक मास बनता है॥9॥ |
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| O best of the two brothers! Two such Naadikas make one Muhurta, thirty Muhurtas make one day and night and the same number of days and nights make one month.॥ 9॥ |
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