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श्लोक 6.3.41  |
एवं भवति कल्पान्ते समस्तं मुनिसत्तम।
वासुदेवस्य माहात्म्यान्नित्यस्य परमात्मन:॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| हे महामुनि! सनातन भगवान वासुदेव के प्रताप से ही कल्प के अन्त में यह सम्पूर्ण प्रलय होता है ॥41॥ |
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| Oh great sage! Due to the greatness of the eternal God Vasudev, this entire upheaval takes place in the end of the Kalpa. 41॥ |
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| इति श्रीविष्णुपुराणे षष्ठेंऽशे तृतीयोऽध्याय:॥३॥ |
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