श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.3.4 
श्रीपराशर उवाच
स्थानात्स्थानं दशगुणमेकस्माद‍्गण्यते द्विज।
ततोऽष्टादशमे भागे परार्द्धमभिधीयते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले, 'हे ब्राह्मण! एक से प्रारम्भ करके दस बार गिनते हुए अठारहवीं बार जो संख्या गिनी जाती है, उसे 'परार्ध' कहते हैं।
 
Sri Parashara said, 'Oh Brahmin! The number which is counted for the eighteenth time while counting ten times starting from one is called 'Parardh'.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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