vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
»
श्लोक 36
श्लोक
6.3.36
केचित्पुरवराकारा: केचित्पर्वतसन्निभा:।
कूटागारनिभाश्चान्ये केचित्स्थलनिभा घना:॥ ३६॥
अनुवाद
कोई नगर के समान बड़े हैं, कोई पर्वत के समान, कोई कूटागार (घर विशेष) के समान और कोई पृथ्वी के समान विस्तृत हैं ॥36॥
Some are as large as a city, some like a mountain, some like a Kutagar (special house) and some are as wide as the earth. ॥ 36॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd