श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.3.34 
शङ्खकुन्दनिभाश्चान्ये जात्यञ्जननिभा: परे।
इन्द्रगोपनिभा: केचित्ततश्शिखिनिभास्तथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
कोई शंख और कुण्ड के समान श्वेत रंग के हैं, कोई चमेली के समान उज्ज्वल हैं और कोई काजल के समान श्याम वर्ण के हैं, कोई इन्द्रगोप के समान लाल रंग के हैं और कोई मोर के समान विचित्र रंग के हैं ॥ 34॥
 
Some are white in colour like the conch and the Kunda, some are bright like jasmine and some are dark like kajal, some are red in colour like the Indragop and some have a strange colour like the peacock. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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