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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
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श्लोक 33
श्लोक
6.3.33
केचिद्रासभवर्णाभा लाक्षारसनिभास्तथा।
केचिद्वैडूर्यसंकाशा इन्द्रनीलनिभा: क्वचित्॥ ३३॥
अनुवाद
कोई गधे के समान रंग के हैं, कोई लाख के रंग के हैं, कोई वादूर्य मणि के समान हैं और कोई नीलमणि के समान हैं॥33॥
Some have the complexion of a donkey, some are of the colour of lac, some are like vadurya gems and some are like sapphire gems.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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