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श्लोक 6.3.30  |
ततो दग्ध्वा जगत्सर्वं रुद्ररूपी जनार्दन:।
मुखनि:श्वासजान्मेघान्करोति मुनिसत्तम॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| हे मुनि! तत्पश्चात् भगवान विष्णु रुद्ररूप धारण करके सम्पूर्ण जगत् को जला देते हैं और अपने मुख की श्वास से बादलों को उत्पन्न करते हैं॥30॥ |
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| Oh great sage! Thereafter, Lord Vishnu in the form of Rudra burns the entire world and creates clouds through the breath of his mouth. 30॥ |
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