श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 28-29
 
 
श्लोक  6.3.28-29 
ततस्तापपरीतास्तु लोकद्वयनिवासिन:।
कृताधिकारा गच्छन्ति महर्लोकं महामुने॥ २८॥
तस्मादपि महातापतप्ता लोकात्तत: परम्।
गच्छन्ति जनलोकं ते दशावृत्त्या परैषिण:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! तदनन्तर अवस्था परिवर्तन के कारण परलोक की इच्छा रखने वाले भुवर्लोक और स्वर्ग में रहने वाले [मन्वादि] अधिकारी अग्नि की ज्वाला से तृप्त होकर महर्लोक में जाते हैं, किन्तु वहाँ भी उस अग्निमय कालानल के महान ताप से तृप्त होकर उससे बचने के लिए जनलोक में जाते हैं। 28-29॥
 
Oh great sage! Subsequently, due to the change of state, the Bhuvarloka and [Manvadi] officials living in the heaven who desire the next world go to Maharlok, fed up with the flame of fire, but there too, being fed up with the great heat of that fiery Kalanala, they go to Janlok to escape from it. 28-29॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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