श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.3.25 
पातालानि समस्तानि सदग्ध्वा ज्वलनो महान्।
भूमिमभ्येत्य सकलं बभस्ति वसुधातलम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वह महान् अग्नि समस्त पाताल लोकों को जलाकर पृथ्वी पर पहुँचती है और सम्पूर्ण पृथ्वी को नष्ट कर देती है ॥25॥
 
That great fire burns all the underworlds and reaches the earth and destroys the entire earth. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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