श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.3.2 
ब्राह्मो नैमित्तिकस्तेषां कल्पान्ते प्रतिसञ्चर:।
आत्यन्तिकस्तु मोक्षाख्य: प्राकृतो द्विपरार्द्धक:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उनमें कल्पान्त में ब्रह्मा का जो नाश होता है, उसे नैमित्तिक, मोक्ष नामक नाश को परम और दो परार्धों के अन्त में जो होता है, उसे प्राकृत नाश कहते हैं॥2॥
 
Among them, the destruction of Brahma in Kalpaant is called Naimittik, the destruction called Moksha is called ultimate and the one that happens at the end of the two Parardhas is called Prakrit destruction. 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd