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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
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श्लोक 19
श्लोक
6.3.19
समुद्रान्सरित: शैलनदीप्रस्रवणानि च।
पातालेषु च यत्तोयं तत्सर्वं नयति क्षयम्॥ १९॥
अनुवाद
वे समुद्रों और नदियों का, पर्वतीय नदियों और झरनों का, तथा विभिन्न पातालों का सारा जल सुखा देते हैं ॥19॥
They dry up all the water in the seas and rivers, in the mountain streams and springs, and in the various underworlds. ॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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