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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
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श्लोक 18
श्लोक
6.3.18
पीत्वाम्भांसि समस्तानि प्राणिभूमिगतान्यपि।
शोषं नयति मैत्रेय समस्तं पृथिवीतलम्॥ १८॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार वे समस्त प्राणियों और पृथ्वी में स्थित समस्त जल को सोखकर सम्पूर्ण जगत् को सुखा देते हैं ॥18॥
O Maitreya, by absorbing all the water present in the living creatures and the earth in this manner they make the entire world dry. ॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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