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श्लोक 6.3.18  |
पीत्वाम्भांसि समस्तानि प्राणिभूमिगतान्यपि।
शोषं नयति मैत्रेय समस्तं पृथिवीतलम्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| हे मैत्रेय! इस प्रकार वे समस्त प्राणियों और पृथ्वी में स्थित समस्त जल को सोखकर सम्पूर्ण जगत् को सुखा देते हैं ॥18॥ |
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| O Maitreya, by absorbing all the water present in the living creatures and the earth in this manner they make the entire world dry. ॥18॥ |
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