श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.3.14 
चतुर्युगसहस्रान्ते क्षीणप्राये महीतले।
अनावृष्टिरतीवोग्रा जायते शतवार्षिकी॥ १४॥
 
 
अनुवाद
एक हजार चतुर्युग बीत जाने पर जब पृथ्वी क्षीण हो जाती है, तब सौ वर्षों तक भयंकर सूखा पड़ता है ॥14॥
 
When the earth becomes depleted after the passage of one thousand Chaturyugas, there is severe drought for a hundred years. 14॥
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