श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.3.13 
तस्य स्वरूपमत्युग्रं मैत्रेय गदतो मम।
शृणुष्व प्राकृतं भूयस्तव वक्ष्याम्यहं लयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! सुनो, मैं उस प्राकृतिक प्रलय के अत्यंत भयानक रूप का वर्णन कर रहा हूँ। इसके बाद मैं तुम्हें भी उस प्राकृतिक प्रलय का वर्णन करूँगा॥13॥
 
O Maitreya! Listen, I am describing the extremely terrifying form of that natural catastrophe. After this I will also describe to you the natural catastrophe.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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