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vishnu 6.2.35: हे द्विजश्रेष्ठ! शूद्र द्विजों की सेवा में तत्पर रहने से और स्त्रियाँ पति की सेवा मात्र से सहज ही धर्म को प्राप्त कर लेती हैं ॥35॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.2.35 
शूद्रैश्च द्विजशुश्रूषातत्परैर्द्विजसत्तमा:।
तथा स्त्रीभिरनायासात्पतिशुश्रूषयैव हि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! शूद्र द्विजों की सेवा में तत्पर रहने से और स्त्रियाँ पति की सेवा मात्र से सहज ही धर्म को प्राप्त कर लेती हैं ॥35॥
 
O best of the two! Shudras easily attain Dharma by being dedicated to the service of Dwijas and women by merely serving their husbands. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)