Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 6.2.15-16: श्रीव्यासजी बोले - हे ब्राह्मणों! सत्ययुग में दस वर्षों तक तप, ब्रह्मचर्य और मन्त्र जप से जो फल प्राप्त होता है, उसे मनुष्य त्रेतायुग में एक वर्ष में, द्वापरयुग में एक मास में और कलियुग में केवल एक दिन-रात में प्राप्त कर लेता है। इसीलिए मैंने कलियुग को सर्वश्रेष्ठ कहा है॥ 15-16॥ | vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन । vishnu अंश 6: षष्ठ अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीव्यासजी बोले - हे ब्राह्मणों! सत्ययुग में दस वर्षों तक तप, ब्रह्मचर्य और मन्त्र जप से जो फल प्राप्त होता है, उसे मनुष्य त्रेतायुग में एक वर्ष में, द्वापरयुग में एक मास में और कलियुग में केवल एक दिन-रात में प्राप्त कर लेता है। इसीलिए मैंने कलियुग को सर्वश्रेष्ठ कहा है॥ 15-16॥
Sri Vyasji said - Oh Brahmins! The fruit which is obtained by performing penance, celibacy and chanting mantras for ten years in Satyayug, a man can get it in one year in Tretayug, one month in Dwaparyug and in just one day and night in Kaliyug. That is why I have called Kaliyug the best.॥ 15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥