श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.1.8 
श्रीमैत्रेय उवाच
कलेस्स्वरूपं भगवन‍‍्विस्तराद्वक्तुमर्हसि।
धर्मश्चतुष्पाद्भगवान‍्यस्मिन्विप्लवमृच्छति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे प्रभु! कृपया कलि के उस रूप का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए, जिसमें चतुर्भुज भगवान धर्म प्रायः लुप्त हो जाते हैं।॥8॥
 
Sri Maitreya said - O Lord! Please describe in detail the form of Kali, in which the four-legged Lord Dharma almost disappears. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)