श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  6.1.60 
तत्राल्पेनैव यत्नेन पुण्यस्कन्धमनुत्तमम्।
करोति यं कृतयुगे क्रियते तपसा हि स:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
तथापि कलियुग में मनुष्य थोड़े से प्रयास से ही बहुत अधिक पुण्य कमा सकता है, जो सत्ययुग में बड़ी तपस्या से प्राप्त किया जा सकता है ॥60॥
 
However, in Kaliyuga, a man can earn a great amount of virtue by just making a little effort, which can be achieved in Satyayuga by great austerity. ॥ 60॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे षष्ठेंऽशे प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)