तथापि कलियुग में मनुष्य थोड़े से प्रयास से ही बहुत अधिक पुण्य कमा सकता है, जो सत्ययुग में बड़ी तपस्या से प्राप्त किया जा सकता है ॥60॥
However, in Kaliyuga, a man can earn a great amount of virtue by just making a little effort, which can be achieved in Satyayuga by great austerity. ॥ 60॥
इति श्रीविष्णुपुराणे षष्ठेंऽशे प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥