श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.1.50 
कलौ जगत्पतिं विष्णुं सर्वस्रष्टारमीश्वरम्।
नार्चयिष्यन्ति मैत्रेय पाषण्डोपहता जना:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! कलियुग में लोग पाखण्ड के वशीभूत होकर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा नहीं करेंगे॥50॥
 
O Maitreya! In Kaliyuga, people will not worship Lord Vishnu, the creator of everything and Lord of the Universe, due to being influenced by heresy. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)