न प्रीतिर्वेदवादेषु पाषण्डेषु यदा रति:।
कलेर्वृद्धिस्तदा प्राज्ञैरनुमेया विचक्षणै:॥ ४९॥
अनुवाद
जब वेद-वाद में प्रीति का अभाव और पाखण्ड में प्रीति होगी, तब ज्ञानी और बुद्धिमान् मनुष्य कलियुग को उन्नत समझेगा ॥49॥
When there is lack of love for Ved-vaad (discourse) and love for heresy, then the wise and intelligent person will consider the Kali-yuga to be advanced. ॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥