श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.1.45 
यदा यदा हि पाषण्डवृद्धिर्मैत्रेय लक्ष्यते।
तदा तदा कलेर्वृद्धिरनुमेया महात्मभि:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जब-जब पाखण्ड बढ़ता हुआ दिखाई दे, तभी महात्माओं को समझ लेना चाहिए कि कलियुग बढ़ रहा है ॥ 45॥
 
O Maitreya! Whenever heresy is seen to be on the rise, only then should the great souls understand that Kali Yuga is on the rise. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)