vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण
»
श्लोक 44
श्लोक
6.1.44
यदा यदा हि मैत्रेय हानिर्धर्मस्य लक्ष्यते।
तदा तदा कलेर्वृद्धिरनुमेया विचक्षणै:॥ ४४॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! जब-जब धर्म की बड़ी हानि होने लगे, तभी-तब बुद्धिमान पुरुष को कलियुग की वृद्धि का अनुमान करना चाहिए ॥ 44॥
O Maitreya! Whenever there appears to be a great loss of Dharma, only then should a wise man estimate the growth of Kali Yuga. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×