श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.1.36 
वैश्या: कृषिवाणिज्यादि सन्त्यज्य निजकर्मयत्।
शूद्रवृत्त्या प्रवर्त्स्यन्ति कारुकर्मोपजीविन:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वैश्यगण कृषि, व्यापार आदि कर्मों को छोड़कर शिल्पकला आदि से जीविका चलाएँगे और शूद्र कर्मों में लग जाएँगे ॥36॥
 
Vaishyagans will leave their activities like agriculture, trade etc. and will earn their living through craftsmanship etc. and will engage in Shudra activities. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)