श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.1.33 
वानप्रस्था भविष्यन्ति ग्राम्याहारपरिग्रहा:।
भिक्षवश्चापि मित्रादिस्नेहसम्बन्धयन्त्रणा:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वानप्रस्थ लोग ग्राम्य भोजन ग्रहण करेंगे (जंगल के कंद-मूल त्याग देंगे) और संन्यासी लोग अपने मित्र आदि के स्नेह-बंधन में बंधे रहेंगे॥ 33॥
 
The Vanaprastha will accept village food [giving up the roots and tubers of the forest] and the Sanyasis will remain bound in the affectionate bonds of their friends etc.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)