श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.1.3 
श्रीपराशर उवाच
मैत्रेय श्रूयतां मत्तो यथावदुपसंहृति:।
कल्पान्ते प्राकृते चैव प्रलये जायते यथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर बोले, 'हे मैत्रेय! कल्प के अंत में होने वाली प्राकृतिक जल-प्रलय में किस प्रकार जीव नष्ट हो जाते हैं, इसे सुनो।'
 
Sri Parashara said, 'O Maitreya! Listen to the manner in which the living beings are destroyed in the natural deluge at the end of the Kalpa.' 3
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)