श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.1.2 
श्रोतुमिच्छाम्यहं त्वत्तो यथावदुपसंहृतिम्।
महाप्रलयसंज्ञां च कल्पान्ते च महामुने॥ २॥
 
 
अनुवाद
अब मैं आपसे कल्प के अंत में होने वाले महाप्रलय नामक जगत् के अन्त का यथार्थ वर्णन सुनना चाहता हूँ॥2॥
 
Now I want to hear from you the exact description of the end of the world called Mahapralaya which will happen in the end of Kalpa. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)