श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.1.13 
येन केन च योगेन द्विजातिर्दीक्षित: कलौ।
यैव सैव च मैत्रेय प्रायश्चित्तं कलौ क्रिया॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्वि जाति के लोग भी जिस किसी साधन से [अर्थात् निषिद्ध पदार्थों आदि के द्वारा] 'दीक्षित' होंगे और ऐसे कर्म प्रायश्चित माने जाएँगे॥13॥
 
At that time, the Dwi caste people will also be 'initiated' by whatever means [i.e. through prohibited substances etc.] and such actions will be considered as atonement. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)