श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.9.37 
प्रलम्बं निहतं दृष्ट्वा बलेनाद्भुतकर्मणा।
प्रहृष्टास्तुष्टुवुर्गोपास्साधुसाध्विति चाब्रुवन्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अद्भुत कर्म करने वाले बलरामजी द्वारा प्रलम्बासुर को मारा हुआ देखकर गोपगण प्रसन्न हो गए और ‘साधु, साधु’ कहकर उसकी स्तुति करने लगे॥37॥
 
Seeing Pralambasur killed by the wonderful Karma Balramji, the Gopas became happy and started praising him saying 'Sadhu, Sadhu'. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)