श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.9.33 
तत्स्मर्यताममेयात्मंस्त्वयात्मा जहि दानवम्।
मानुष्यमेवावलम्ब्य बन्धूनां क्रियतां हितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे अमेयात्मान! अपने वास्तविक स्वरूप का स्मरण करो और मनुष्य स्वभाव को अपनाकर इस राक्षस को मार डालो और अपने मित्रों का कल्याण करो ॥33॥
 
Therefore, O Ameyaatman, remember your true nature and adopt the human nature and kill this demon and do good to your friends. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)