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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 9: प्रलम्ब-वध
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श्लोक 32
श्लोक
5.9.32
भवानहं च विश्वात्मन्नेकमेव च कारणम्।
जगतोऽस्य जगत्यर्थे भेदेनावां व्यवस्थितौ॥ ३२॥
अनुवाद
हे विश्वात्मान! आप और मैं दोनों ही इस जगत के एकमात्र कारण हैं। हमने जगत के कल्याण के लिए भिन्न-भिन्न रूप धारण किए हैं ॥ 32॥
O Vishwatman! You and I both are the only cause of this universe. We have assumed different forms for the welfare of the universe. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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