श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  5.9.3-4 
क्ष्वेलमानौ प्रगायन्तौ विचिन्वन्तौ च पादपान्।
चारयन्तौ च गा दूरे व्याहरन्तौ च नामभि:॥ ३॥
निर्योगपाशस्कन्धौ तौ वनमालाविभूषितौ।
शुशुभाते महात्मानौ बालशृङ्गाविवर्षभौ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
गायों को बाँधने वाली रस्सी को कंधों पर रखकर तथा वन की मालाओं से सुसज्जित होकर वे दोनों महात्मा गर्जना करते, गाते, वृक्षों पर चढ़ते, दूर-दूर तक गायों को चराते तथा उनके नाम पुकारते हुए ऐसे सुन्दर दिख रहे थे, जैसे नये सींग वाले बछड़े हों।
 
With the rope used to tie the cows on their shoulders and adorned with garlands of the forest, the two great souls roared, sang, climbed trees, grazed the cows for long distances and called out their names, and were looking as beautiful as calves with new horns.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)