श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.9.23 
श्रीकृष्ण उवाच
किमयं मानुषो भावो व्यक्तमेवावलम्ब्यते।
सर्वात्मन् सर्वगुह्यानां गुह्यगुह्यात्मना त्वया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्णचन्द्र बोले - हे परमात्मा! आप समस्त गुप्त वस्तुओं में सबसे गुप्त स्वरूप होने पर भी इस स्पष्ट मानवी भाव का आश्रय क्यों ले रहे हैं?॥ 23॥
 
Shri Krishnachandra said – Oh Supreme Soul! Why are you relying on this clearly human feeling despite being the most hidden form among all the hidden things?॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)